रोज़मर्रा की थाली में ऐसी कई चीज़ें होती हैं जो देखने में साधारण लगती हैं, लेकिन शुगर के मरीज़ों के लिए वे नुकसानदेह हो सकती हैं। समय रहते सही जानकारी होना ज़रूरी है।
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शुगर की बीमारी में शरीर खाने को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया को उतनी कुशलता से नहीं कर पाता। इसीलिए जो चीज़ें तेज़ी से ग्लूकोज़ बनाती हैं, वे रक्त शर्करा को अचानक ऊँचा कर देती हैं।
इन 7 खाद्य पदार्थों की पहचान करना एक ज़रूरी पहला कदम है। हर किसी की ज़रूरत अलग होती है, इसलिए अपना आहार प्लान बनाने के लिए अपने चिकित्सक से बात ज़रूर करें।
एक नज़र में समझें कि किस चीज़ की जगह क्या लें
यह तालिका सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
इनमें से कुछ चीज़ें ऐसी हैं जो हम रोज़ खाते हैं — और जानते भी नहीं
हलवा, बर्फी, गुड़, चॉकलेट — इनमें जो शर्करा होती है वह बहुत जल्दी रक्त में मिल जाती है। यह शुगर के मरीज़ों के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है।
टेट्रापैक जूस, कोल्ड ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक — इनमें फ्रुक्टोज़ और एडेड शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है। ये देखने में फलों जैसे लगते हैं पर होते नहीं।
सफेद ब्रेड, पाव, क्रेकर, कुकीज़ — ये सब रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के स्रोत हैं। इनमें फाइबर नगण्य होता है इसलिए ये बहुत तेज़ी से पचते हैं।
सॉसेज, कोल्ड कट्स, तली हुई चिकन स्किन और रेड मीट — इनमें संतृप्त वसा इंसुलिन के काम में बाधा डालती है और अग्न्याशय पर ज़ोर बढ़ाती है।
बर्गर, पिज़्ज़ा, फ्रेंच फ्राइज़, समोसे — इनमें ट्रांस फैट, नमक और रिफाइंड कार्ब का मेल होता है जो रक्त शर्करा के साथ-साथ रक्तचाप भी बिगाड़ता है।
अंगूर, केला, चीकू, अंजीर, खजूर और किशमिश — इनमें प्राकृतिक रूप से शर्करा अधिक होती है। शुगर में इनकी मात्रा को लेकर डॉक्टर से परामर्श ज़रूरी है।
ये उत्पाद ट्रांस फैट और ओमेगा-6 से भरे होते हैं जो शरीर में सूजन बढ़ाते हैं और धमनियों को नुकसान पहुँचाते हैं। इन्हें देसी घी या जैतून के तेल से बदलना बेहतर है।
सूजी, सफेद चावल और मैदे की खिचड़ी — ये भी धीरे-धीरे शुगर बढ़ाती हैं। बहुत नमकीन अचार किडनी पर असर डाल सकता है। मीठे फ्लेवर्ड दही में छुपी चीनी होती है।
शराब रक्त शर्करा को अनिश्चित तरीके से प्रभावित करती है — कभी अचानक बढ़ाती है, कभी घटाती है। शुगर में इससे पूरी तरह बचना ही उचित माना जाता है।
हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे कदम से होती है। अगर आप रोज़ कोल्ड ड्रिंक पीते हैं, तो उसे पहले हफ्ते में तीन बार करें, फिर एक बार — और फिर बंद। इस तरह बदलाव टिकाऊ होता है और मन का विरोध भी कम रहता है।
शुगर के मरीज़ों के लिए भोजन का समय भी उतना ही ज़रूरी है जितनी उसकी किस्म। खाने के बीच बहुत लंबा अंतराल रखने से भी शर्करा का स्तर अस्थिर हो सकता है। नियमित और संतुलित भोजन से इसे काबू में रखा जा सकता है।
यह पृष्ठ केवल जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले अपने डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
जब से मैंने समझा कि केला और किशमिश भी शुगर बढ़ाते हैं, मैंने अपनी सुबह की आदत बदली। अब सेब खाता हूँ और दिन भर हल्का महसूस होता है।
— विनोद शास्त्री, हैदराबाद
मेरी माँ डायबिटीज़ की मरीज़ हैं। इस जानकारी को पढ़कर मैंने घर का मेनू बदला। अब घर में सफेद ब्रेड नहीं आती — और माँ की रिपोर्ट भी बेहतर है।
— मीना रेड्डी, चेन्नई
फास्ट फूड पूरी तरह बंद कर दिया। शुरू में मुश्किल लगी, पर दो महीने बाद शरीर इतना हल्का लगने लगा कि अब बाहर खाने की इच्छा भी नहीं होती।
— अशोक तिवारी, भोपाल
मार्जरीन की जगह थोड़ा घी और जैतून का तेल इस्तेमाल करने लगी। डॉक्टर ने कहा कोलेस्ट्रॉल भी ठीक हो रहा है — यह सुनकर अच्छा लगा।
— ललिता नायर, मुंबई
कोल्ड ड्रिंक की जगह नारियल पानी पीना शुरू किया। सस्ता भी है, ताज़गी भी देता है और शुगर पर असर भी नहीं पड़ता।
— राकेश सोनी, जोधपुर
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सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है, लेकिन इसे पूरी तरह बंद करना हर किसी के लिए ज़रूरी नहीं। मात्रा कम करना और दाल-सब्ज़ी के साथ खाना — यह फर्क डाल सकता है। ब्राउन राइस एक बेहतर विकल्प है।
नारियल पानी में प्राकृतिक शर्करा होती है, लेकिन सीमित मात्रा में इसे ठीक माना जाता है। हालाँकि, यह हर व्यक्ति पर अलग असर कर सकता है। अपने डॉक्टर से पूछकर तय करें।
कम वसा वाला दूध और पनीर आमतौर पर उचित माना जाता है। दूध में लैक्टोज़ होता है जो एक प्रकार की शर्करा है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखें। मीठी लस्सी या फ्लेवर्ड दूध से परहेज़ करें।
दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। सिर्फ आहार बदलने से या सिर्फ व्यायाम से उतना फायदा नहीं होता जितना दोनों को एक साथ करने से। रोज़ 30 मिनट की हल्की सैर भी बड़ा फर्क कर सकती है।
यह सवाल आपके डॉक्टर से पूछना सबसे सही रहेगा। कुछ मामलों में सही खानपान और जीवनशैली से शर्करा का स्तर सामान्य के करीब लाया जा सकता है। यहाँ दी गई जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है।